जरा टूटे हुए दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो ।।

Bhagwat Pravakta- Swami Dhananjay Maharaj
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जरा टूटे हुए दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो ।। Jara Tute Huye Dil Ke Tukade To Utha Lene Do.
 

जय श्रीमन्नारायण,

       प्यारे कन्हैया, प्यारे कान्हा जी !

                  मैं तुम्हें इतने प्यार से बुलाता हूँ, कभी भूलकर ही सही “आ भी जाओ प्यारे” ।।

प्यारे ! आंसू बहे तो एहसास होता है ।
आपके बिना जीवन कितना उदास होता है ।।
आप सदा ही चाँद की तरह चमकते रहें ।
आपकी याद भी कहाँ हर किसी के पास होता है ।।

हकीकत बयां करूँ तो प्यारे ! मैं आपके इन्तजार में हूँ ।
पर क्या करूँ? अटक सा गया हूँ, नए रिश्तों की दीवार में हूँ ।।

कभी-कभी सोंचता हूँ प्यारे !

मुझे समझने का दौर कभी क्यूँ नहीं होता ?
मुझसा मजबूर कभी तूं क्यूँ नहीं होता ?
क्या फ़र्क़ है तेरी वफ़ा और मेरी वफ़ा में ?
मुझे बेहिसाब है, पर तुझे दर्द क्यूँ नहीं होता ?।।

मुद्दतों तक आपकी तलाश जारी रख्खी ।
आपके दीदार की दिल में आस बनाये रख्खी ।।
उम्मीद का दिया कभी बुझने नहीं दिया ।
परन्तु किस्मत ने क्यों मेरी जिंदगी उदास रख्खी ।।

ढूंढ़ ही लेता है मुझे दर्द किसी ना किसी बहाने से ।
वाकिफ हो गया है ये दर्द भी मेरे हर ठिकाने से ।।
जिंदगी साथ छोड़ ही देगी एक-न-एक दिन प्यारे !
याद करता हूँ, टूटे दिल के टुकड़ों को उठाने के बहाने से ।।

नाराज़ मत हो प्यारे ! चले जाएंगे तुम्हारी ज़िन्दगी से ।
जरा टूटे हुए दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो ।।
 

कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

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जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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