आरजू ये है की उनकी एक नजर मुझे भी देखा करे ।।

Bhagwat Pravakta- Swami Dhananjay Maharaj
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आरजू ये है की उनकी एक नजर मुझे भी देखा करे ।। Aarazun Ye Hai Ki Unaki Ek Nazar Mujhe Bhi Dekha Kare.


जय श्रीमन्नारायण,

         प्यारे कन्हैया, प्यारे कान्हा जी !

                     मैं तुम्हें इतने प्यार से बुलाता हूँ, कभी भूलकर ही सही "आ भी जाओ प्यारे" ।।

दिल में है जो दर्द वो बताएं किसे ।
हंसते हुए ये ज़ख्म दिखाएँ किसे ।।
कहती है ये दुनियाँ हमें खुश नसीब ।
मगर इस नसीब की दास्ताँ बताएं किसे ।।

bhagwan krishna

इस तरह मेरी तरफ मेरा कन्हैया देखे ।
दर्द दिल में ही रहे और दवा हो जाए ।।
जिंदगी को मिले कोई हुनर ऐसा भी ।
सबमे मौजूद भी हो और फना हो जाए ।।

 

दिल में उम्मीद की समां जला रखी है ।
हमने अपनी अलग दुनिया बसा रखी है ।।
इस उम्मीद के साथ की आएंगे वो कभी ।
हमने हर राह पर अपनी पलकें बिछा रखी है ।।

 

आरजू ये है की उनकी एक नजर मुझे भी देखा करे ।
वही अपने सामने हो हम जिधर देखा करे ।।
एक तरफ हो सारी दुनिया एक तरफ तेरी सूरत हो ।
हम तुझे दुनिया से होकर बेखबर देखा करे ।।

Bhagwat Pravakta Swami Dhananjay Maharaj

हमारी हर ख़ुशी का एहसास तुम्हारा हो ।
तुम्हारे हर गम का दर्द हमारा हो ।।
मर भी जाये तो हमें कोई गम नहीं ।
बस आखिरी वक़्त साथ तुम्हारा हो ।।

 

कभी कभी हमें भी यूँ ही याद कर लिया करो ।
हमें भी देख कर कभी मुस्कुरा दिया करो ।।
माना की तुम्हें कमी नहीं है मानने वालों की ।
लेकिन हमें भी कभी अपनी दुआ में शामिल कर लिया करो ।।

 

काश तुम मुझे एक खत लिख देते ।
मुझमे क्या क्या थी कमी ये तो बता देते ।।
तड़पते दिल से मेरे तुमने दुरी क्यों की ।
इस दुरी की ही सही मुझे वजह तो बता देते ।।

Swami Dhananjay Maharaj
कभी तो आ भी जाओ प्रियतम ! क्योंकि प्यारे ! आपके बिना हमारा कोई आस्तित्व ही नहीं बचता ।।

जय जय श्री राधे ।।
जय श्रीमन्नारायण ।।

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